आयुर्वेद महाविद्यालय या विश्वविद्यालय के प्रारंभ में करणीय काम

आयुर्वेद महाविद्यालय या विश्वविद्यालय के प्रारंभ में करणीय काम
प्रस्तुति : वृषभ प्रसाद जैन

०. आयुर्वेद पर फिर से जनमानस में आस्था जगाना;
१. औषधीय गुणों वाले वनस्पतियों के नाम और उनका संग्रह तथा उनके बारे में जो भी जानकारी
लोक में हो, उसे भी संग्रहीत करना
अ. वैद्यों से, ब. अनुभवियों या वृद्ध जनों से
२. नाड़ी वैद्यों की सूची तथा इनमें से कुछ को तैयार करना, जो अगली पीढ़ी को तैयार करने को
तैयार हों
३. रोगों पर ज्योतिष के संबंध में चर्चा करने वाले विशेषज्ञों की सूची
४. विस्तृत ग्रंथों के संदर्भों के साथ समाधि काल निकालना और रोगों के निदान के लिए तदनुसार
संलग्न होने वाला दल बनाना
५. रोगों के साथ मन्त्र प्रयोग पर बल
६. “रोग का इलाज या रोगी का” इस विषय पर चर्चाएँ और परिचर्चाएँ अभी पूरे देश में और फिर
पूरे विश्व में आयोजित करना
७. कुछ तीर्थों/स्थानों को समाधि साधना स्थल के रूप में विकसित करना
८. आयुर्वैदिक जीवन-पद्धति को फिर से स्थापित करना
९. आहार विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर काम करना
अ. आहार और ऋतुएँ, ब. आहार विशेष के बनाने की पद्धति,
स. आहार विशेष की पोषक गुण व मूल्य, द. पथ्य व कुपथ्य
१०. रोगी की सेवा बनाम वैय्यावृत्ति
११. यदि कोई तंत्र वैद्य हैं, तो उनकी सूची
१२. औषधियाँ और उनकी सेवन विधि
१३. आहार्य वस्तु, आहार काल और सेवन विधि
१४. आहार के विषय में पारंपरिक और शास्त्रीय संदर्भों का आलोडन,
१५. आधुनिक अनुसंधान पद्धति से जोड़कर आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा को समृद्ध करना,
१६. जिन्हें आयुर्वेद महाविद्यालय में अध्यापक आगे चलकर नियुक्त करना, उन्हें वास्तविक
आयुर्वेद प्रधान विशेषज्ञों के संरक्षण में औषधालय में अभी से ही प्रयोग आधारित शिक्षण प्रशिक्षण
दिलाते हुए तैयार करना,
१७. क्या हम पहले इस स्नातकोत्तर अध्ययन और अनुसंधान प्रारंभ कर सकते हैं और फिर उसके
बाद स्नातकीय अध्ययन इसकी संभावना पर भी विचार करना;
१८. पिछले ७-८ सालों से जो बच्चे आयुर्वेदाचार्य बनकर निकल रहे हैं, वे CPMT के माध्यम से
चुने जाते हैं, उनमें ऐसे बच्चे ही अधिकांश चुने जाते हैं, जिनकी संस्कृत की कोई पृष्ठभूमि नहीं
होती, अब भला बताइये वह कैसे आयुर्वेद के ग्रंथ पढ पाएगा और कैसे उस चिकित्सा पद्धति को
सीख सकेगा? ...इसलिए हमें ऐसे अध्येता ढूंढने होंगे, जिनकी पृष्ठभूमि संस्कृत की हो और तब
आयुर्वेद का अध्ययन हो, यदि ऐसी नहीं मिलते हैं तो हमें ऐसे तैयार करने होंगे और तब अध्ययन
अध्यापन विकसित करना होगा।
१९. यदि हम तीन या पाँच वर्ष बाद आयुर्वेद विद्यालय प्रारंभ करना चाह रहे हैं, तो हमें अपनी
ज़रूरत के अध्यापक अभी से नियुक्त कर उन्हें संबंधित विशेषज्ञों से तैयार करना/कराना होगा।
२०. हम सिद्ध औषधियों को लेकर अभी से फ़ार्मेसी और औषधालय ज़रूर प्रारंभ कर सकते हैं।
इस विषय पर जो भी मित्र, साधर्मी, सहयोगी हमारे साथ जिस किसी रूप में भी (आर्थिक,
बौद्धिक, सांगठनिक सहयोग देकर, सर्वेक्षक, सर्वेक्षण सहायक, सर्वेक्षण व्यवस्थापक, कुछ
धनराशि लेकर सहयोगी बनकर, बिना धनराशि के सहयोगी बनकर आदि आदि), जिस किसी
क्षेत्र से भी जुड़कर काम करना चाहते हैं, वे हमसे निम्न पर संपर्क कर सकते हैं—
vrashabh.jain@gmail.com
www.worldjm.org साईट पर
निम्न whatsapp समूह पर संपर्क कर—
आहार विज्ञान
निम्न मोबाइल पर sms सन्देश के द्वारा अभिरुचि व्यक्त कर—

९४५३३२३११३, ९८११७८५२४६

Comments

  1. It's a mixer of the body of insects and fungus. A fungus on a caterpillar's head, which is used as a medicine. It has an Indian name called Keeda Jadi, which is known as an insect herb. Keeda Jadi founds on the Himalayas, also known as Himalayan Viagra and energy booster, also effective for many diseases, including impotence and cancer, more expensive than sleep. It improves strength, increases energy levels, where it is used for medical purposes since the 14th century. Keeda Jadi Supplier Yarsagumba supplier

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